नौकरियों, पदोन्नतियों में आरक्षण देने के लिए राज्य सरकारें बाध्य नहीं है: उच्चतम न्यायालय

नयीदिल्ली,नौफरवरी(भाषा)उच्चतमन्यायालयनेकहाहैकिराज्यसरकारेंनियुक्तियोंमेंआरक्षणदेनेकेलिएबाध्यनहींहैतथापदोन्नतिमेंआरक्षणकादावाकरनेकाकोईमूलअधिकारनहींहै।न्यायमूर्तिएलनागेश्वररावऔरन्यायमूर्तिहेमंतगुप्ताकीपीठनेकहा,‘‘इसन्यायालयद्वारानिर्धारितकानूनकेमद्देनजरइसमेंकोईशकनहींहैकिराज्यसरकारेंआरक्षणदेनेकेलिएबाध्यनहींहै।ऐसाकोईमूलअधिकारनहींहैजिसकेतहतकोईव्यक्तिपदोन्नतिमेंआरक्षणकादावाकरे।’’पीठनेअपनेफैसलेमेंकहा,‘‘न्यायालयराज्यसरकारकोआरक्षणउपलब्धकरानेकानिर्देशदेनेकेलिएकोईपरमादेशनहींजारीकरसकताहै।’’उत्तराखंडसरकारकेपांचसितम्बर2012केफैसलेकोलेकरदायरयाचिकाओंपरसुनवाईकरतेहुएशीर्षन्यायालयनेयहटिप्पणीकी।गौरतलबहैकिउत्तराखंडसरकारनेराज्यमेंअनुसूचितजातिऔरअनुसूचितजनजातिकोआरक्षणउपलब्धकरायेबगैरसार्वजनिकसेवाओंमेंसभीपदोंकोभरेजानेकाफैसलालियागयाथा।सरकारकेफैसलेकोउत्तराखंडउच्चन्यायालयमेंचुनौतीदीगईथी,जिसनेइसेखारिजकरदियाथा।उच्चन्यायालयकेफैसलेकेखिलाफअपीलोंपरसुनवाईकरतेहुएशीर्षन्यायालयनेकहा,‘‘यहनिर्धारितकानूनहैकिराज्यसरकारकोसार्वजनिकपदोंपरनियुक्तियोंकेलिएआरक्षणउपलब्धकरानेकेनिर्देशनहींदियेजासकतेहै।इसीतरहसरकारपदोन्नतिकेमामलोंमेंअनुसूचितजातिऔरअनुसूचितजनजातिकेलिएआरक्षणदेनेकेलिएबाध्यनहींहै।’’पीठनेकहा,‘‘हालांकिअगरवे(राज्य)अपनेविशेषअधिकारोंकाइस्तेमालकरतेहैऔरपदोन्नतिमेंआरक्षणदेनेकाप्रावधानकरतेहैतोसबसेपहलेउसेइसतरहकेआंकड़ेइकट्ठाकरनेहोंगे,जिससेयहस्पष्टहोताहोकिसार्वजनिकपदोंपरकिसीविशेषवर्गकाप्रतिनिधित्वकमहै।’’उत्तराखंडसरकारकीसितम्बर2012कीअधिसूचनाकोबरकराररखतेहुएशीर्षन्यायालयनेकहाकिसरकारपदोन्नतियोंमेंआरक्षणउपलब्धकरानेकेलिएबाध्यनहींहै,इसलिएउच्चन्यायालयकोराज्यकेफैसलेकोअवैधनहींघोषितकरनाचाहिएथा।आरक्षणकेबारेमेंसंवैधानिकप्रावधानकाजिक्रकरतेहुएपीठनेकहा,‘‘यहराज्यसरकारकोतयकरनाहैकिसरकारीपदोंपरनियुक्तिऔरपदोन्नतिकेमामलेमेंआरक्षणकीआवश्यकताहैयानहीं।’’