मलेशिया की कुल आबादी से अधिक लोग भारत में सड़कों पर रहने को मजबूर

नईदिल्ली:देशभरमेंकड़ाकेकीठंडनेदस्तकदेदीहै.तापमानकेगिरनेसेदेशकेअलग-अलगइलाकोंमेंठंडबढ़नेलगाहै.ऐसेमेंलोगसर्दीसेबचनेकेलिएअलावजलानाशुरूकरदियाहै.लेकिनआपकोजानकरहैरानीहोगीकिदेशमेंकईऐसेलोगहैंजोकंपकपातीठंडमेंभीखुलेआसमानकेनीचे, सड़ककिनारे सोनेकेलिएमजबूरहैं.भारतमेंऐसेलोगोंकीसंख्यामलेशियाकीकुलआबादीसेभीज्यादाहै.अगरभारतकेबेघरलोगोंकोएकसाथरखाजाएतोइनकीआबादी83देशोंकीजनसंख्यासेभीज्यादाहोगी.

पहलेनंबरहैकानुपर

मार्च2017मेंछपीहिंदुस्तानटाइम्सकीएकखबरकेमुताबिकदेशमेंसबसेज्यादाबेघरलोगोंकीसंख्यायूपीकेकानपुरशहरमेंहै.यहांएकहजारकीआबादीमें18लोगबेघरहैं.कानपुरशहरयूपीकाव्यवसायिककेंद्रमानाजाताहै.खासकरचमड़ाउद्योगकोलेकरशहरकीएकअलगपहचानहै.लेकिनइसकेसाथहीयेभीसच्चाईहैकियहांबेघरलोगोंकीसंख्यासबसेज्यादाहै.येआंकड़ेसाल2011कीजनगणनाकेआधारपरहैं.

कानपुरकेबादकोलकाताकानंबरआताहै.बेघरलोगोंकीआबादीकेहिसाबसेकानपुरदूसरेनंबरपरहै.यहांएकहजारकीआबदीपर15लोगबेघरहैं.चौथे नंबरपरमुंबईकानामआताहै.यहांएकहजारकीआबादीपर12लोगबेघरहैं.

तीसरेनंबरपरहैदिल्ली

बेघरलोगोंकीआबादीकेमामलेमेंदेशकीराजधानीदिल्लीकाभीनामहै.दिल्लीकेतीनइलाकेतीसरे,पांचवेंऔरछठेनंबरपरआतेहैं.तीसरेनंबरपरसेंट्रलदिल्लीहै. पांचवेनंबरनईदिल्लीऔरछठेनंबरपरउत्तरीदिल्लीकानामआताहै.ध्यानदेनेवालीबातयेहैकि राजधानीमेंजोलोगबेघऱहैंवेदिल्लीकेरहनेवालेनहींहैं.

दिल्लीमेंरैनबसेरे

दिल्लीसरकारकेदिल्लीनगरीयआश्रयसुधारबोर्ड(डीयूएसआईबी)ने15दिसम्बर2017को'विंटरएक्शनप्लान'कीघोषणाकरतेसमयकहाथाकिदिल्लीमेंइससमय251रैनबसेरेहैं.इनमें83रैनबसेरेइमारतोंमेंबनेहैं,113रैनबसेरेअस्थाईकेबिनमेंसंचालितहैं,जबकि55अस्थाईरैनबसेरेटेंटमेंबनाएगएहैं. हालांकि,बोर्डयहदावाकरताहैकिरैनबसेरोंमेंलगभग20000लोगरहसकतेहैंऔरमात्र10000लोगइससमयउनकाउपयोगकररहेहैं.दिल्लीसरकारनेयहभीघोषणाकीकिजनवरीखत्महोनेसेपहलेरैनबसेरोंमेंरहरहेलोगोंकोनाश्तेमेंचायऔररस्कदियाजानेलगेगा.

दिल्लीमेंकितनेलोगहैंबेघर?

बोर्डनेकहाकिबेघरोंकोरैनबसेरोंमेंलानेकेलिए20दलसक्रियहैंऔरवेप्रतिदिनरातमेंगश्तकरतेहैं.बेघरलोगोंकीसूचनादेनेकेलिएकोईभीनागरिकदिनके24घंटेहमारेकंट्रोलरूममें(011-23378789/8527898295/96)परफोनकरसकताहै. रैनसेरामोबाइलएपपरभीसूचनादेसकताहै. लेकिन,सरकारकेप्रयासोंकेबाबजूदहजारोंलोगअभीभीदिल्लीकीसड़कोंपररहनेकोमजबूरहैं.बोर्डके2014मेंकराएएकसर्वेकेअनुसारदिल्लीमें16000बेघरलोगहैंजबकिविभिन्नगैरसरकारीसंगठनों(एनजीओ)केअनुमानकेमुताबिकयहसंख्याएकलाखतकयाउससेभीज्यादाहोसकतीहै.

एनजीओसेंटरऑफहोलिस्टिकडिपार्टमेंटकेकार्यकारीनिर्देशकसुनीलकुमारअलेडियानेकहाकिराष्ट्रीयशहरीजीवनअधिकारमिशनकेमानकोंकेअनुसाररैनबसेरोंमेंप्रतिव्यक्तिकमसेकम50वर्गफीटकीजगहमिलनीचाहिएलेकिनदिल्लीमेंजगहकीकमीकेचलतेलोगोंकोमात्रा10से12वर्गफीटजगहहीमिलपातीहै.इसलियेज्यादातरलोगक्षमतासेअधिकभरेरैनबसेरोंमेंनहींरहनाचाहतेहैं.

अलेडियाकेअनुसारइसबारसर्दीकेमौसममें1दिसम्बरसे14दिसम्बरकेबीचलगभग108बेघरलोगोंकीमौतहोचुकीहै. उनकेअनुसार2016,2015और2014केदिसम्बरमहीनेमेंक्रमश:235,251और279लोगोंकीमौतहुईथी.