भारत में प्रतिकूल होती जा रही है अकादमिक आजादी की भावना :अमत्र्य सेन

नयीदिल्ली,22फरवरी::अर्थशास्त्रीअमत्र्यसेनकाकहनाहैकिभारतमेंविश्वविद्यालयोंकीस्वायत्तताकीअवधारणातेजीसेप्रतिकूलहोतीजारहीहै।उनकीइसटिप्पणीकोजवाहरलालनेहरूविश्वविद्यालयजैसेसंस्थानोंकेपरिसरोंमेंछात्रोंकेविरोधप्रदर्शनकीपृष्ठभूमिमेंदेखाजारहाहै।नोबेलपुरस्कारविजेतासेनकेमुताबिकभारतमेंआजादीऔरभाईचारेकीभावनाकठिनसमयकासामनाकररहीहैऔरलोगराष्ट्रविरोधीकहेजानेकेडरसेसरकारकेखिलाफबोलनेसेघबरातेहैं।उन्होंनेकलयहांइंडियाहैबिटेटसेंटरमेंअपनीपुस्तककलेक्टिवच्वॉइसएंडसोशलवेल्फेयरकेविस्तृतसंस्करणकेविमोचनकेमौकेपरकहा,यूरोपऔरअमेरिकामेंस्वायत्तताऔरअकादमिकआजादीकेमहत्वकोआसानीसेसमझाजाताहै,लेकिनभारतमेंयहसोचतेजीसेप्रतिकूलहोतीजारहीहै।अर्थशास्त्रीनेकहाकिसरकारकेलिएजरूरीहैकिकिसीशिक्षणसंस्थानकोआर्थिकमदददेनेऔरउसकेकामकाजमेंहस्तक्षेपकरनेमेंअंतरहोनाचाहिए।उन्होंनेकहा,प्रादेशिकविश्वविद्यालयोंकेलिएपैसासरकारसेआताहै।सरकारइसेखर्चकरतीहैलेकिनउसपरसरकारकास्वामित्वनहींहोता।सरकारइसधनकोखर्चकरतीहै,इसकायहमतलबनहींहैकिसरकारकोविश्वविद्यालयोंकेसंबंधमेंमहत्वपूर्णनिर्णयलेनेचाहिए।सेननेसीधाउल्लेखतोनहींकियालेकिनजेएनयूप्रशासनद्वाराएकविवादास्पदमुद्देपरछात्रोंकोसंबोधितकरनेकोलेकरशिक्षकोंकोनोटिसजारीकियेजानेकेमुद्देकोवहछूतेदिखे।